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12, सितम्बर, 2015
समुद्र तट से 1938 मीटर की ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल सैर-सपाटे के लिये बेहद उम्दा शहर है। यहां की ऊंची-ऊंची पर्वत श्रृंखलायें, लहराते हुये हरे-भरे पेड़ों की चोटियां और ठण्डी आबो-हवा किसी का भी दिल जीतने के लिये काफी है। शहर का दिल कहलायी जाने वाली नैनी झील यहां के आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। आप नैनीताल किसी भी मौसम में आ सकते है। यहां पर आपको हमेशा चहल पहल मिलेगी ही।
हम लोग तकरीबन साढ़े दस बजे नैनीताल पहुँच गए। हमे नैनी झील का शानदार नजारा दिख रहा था, झील के दोनों ओर सड़क बनी है, जिसे मल्लीताल व तल्लीताल कहा जाता है। नैनीताल में बच्चो के लिए बहुत स्कूल बने है, जहां पर हास्टल सुविधा होती है। शेरवुड व बहुत से अन्य नामी स्कूल यहां पर खुले है। मुझे भी अपने एक जानकार के बच्चे से मिलने ऐसे ही एक स्कूल (बिरला स्कूल) में जाना था, यह नैनीताल जू (Zoo) वाली रोड पर स्थित है, हम नैनीताल मे प्रवेश करते ही एक दुकान पर पहुँचे, जहां से बच्चे के लिए कुछ जूस वगैरहा ले लिया, दुकान वाले से ही रास्ता पुछा तो उसने बताया की कुछ दिन पहले यहां पर बहुत तेज बारिश होने के कारण वह रास्ता कई जगह से टुट गया है, जो फिलहाल तो बंद है। फिर हमने यही रास्ता बंद होने की बात एक पुलिस वाले से भी जानी। फिर मैंने अपने जानकार व बच्चे के पिता को ही फोन लगाया ओर इस बात से अवगत कराया की रास्ता तो बंद है, तब उन्होंने हमे दूसरा रास्ता बताया। हम उनके बताए रास्ते पर चल दिए।
नैनीताल मे मॉलरोड पर गाड़ी प्रवेश शुल्क देना होता है, यह शुल्क (100रू०) देकर हम मॉलरोड मे प्रवेश कर गए, मॉल रोड नैनीताल की पहचान है, काफी सारे होटल, रेस्तराँ, दुकानें व स्ट्रीट फूड वाले यहां पर होते है ओर रात मे यह रोड जन्नत सी बन जाती है, मालरोड के किनारे किनारे नैनीझील भी है, जो हर समय सुंदर ही दिखाई देती रहती है। झील मे चलती नाव, तैरती बत्तखे, इसे ओर भी सुंदर बना देती है। झील के किनारे ही तिब्बती मार्केट बनी है, ओर साथ मे मां नैनादवी का मन्दिर भी।
हम लोग गाड़ी से मॉलरोड पार करते हुए, बारापत्थर पहुँचे। जहां से एक रोड सडियाताल ओर खुरपाताल से होते हुए रामनगर की तरफ चला जाता है, ओर दूसरा रोड नैना पीक व झील व्यू प्वाइंट तक चला जाता है, हम दूसरे वाले, यहां कहे की दाहिने वाले रोड पर मुड़ गए। कुछ तकरीबन 2km चलने पर एक छोटा सा रास्ता दाहिने तरफ कट जाता है, हम उसी पर हो लिये। यह रास्ता इतना छोटा था की बस एक ही गाड़ी चल सकती थी, इसी रास्ते पर एक गांव भी पड़ा, फिर यह रास्ता बिरला स्कूल पर जाकर ही खत्म होता है। स्कूल गए वहां पर जाकर बच्चे का नाम, कौन सी क्लास मे पढ़ता है बताया, तब जाकर हमे अंदर जाने दिया। स्कूल काफी ऊंचाई पर तो बना है, ही साथ मे चीड, देवदार के पेडो के बीच बसा है। इसलिए यहां का नजारा बहुत ही मन मोहने वाला था, यहां पर बड़ी ठंडी हवा चल रही थी ओर साथ मे कोहरा भी आ जाता था, बड़ा ही सुंदर मौसम था यहां पर , यह स्कूल काफी बड़ा भी है, वो तो हमे बाते करते हुए एक टीचर ने सुन लिया, ओर वो हमारे पास आ गए तब हमने उन्हें बताया की हम एक बच्चे (सार्थक, 11th class) को देखने आए है। तब उन्होंने हमारी बहुत मदद की, हमे अपनी गाड़ी मे बिठाकर, क्लास तक ले गए, वहा पर सार्थक नही था, फिर उन्होंने पता कराया की वह कहां पर है, पता चला की वह स्कूल की डिस्पैंसरी मे है, फिर वो हमे वहां पर ले गए। हम सार्थक से मिले व कुछ अस्वस्थ लग रहा था, मैंने उसकी बात उसके पिता से कराई ओर वह उसी दिन स्कूल के हेडमास्टर के साथ दिल्ली चला गया। हमने जिस टीचर मे हमारी मदद की, उनको धन्यवाद किया, टीचर का नाम ललित शर्मा था ओर वह गाजियाबाद के रहने वाले थे, उन्होंने हमारी भाषा से ही पहचान लिया था की हम गाजिायबाद से आए है, उनको धन्यवाद करके हम वापिस चल पड़े।
हम लोग वापिस मैन रोड पर आ गए। लगभग दिन के तीन बज रहे थे। वैसे हमने आज अलमोडा व वहां से बिनसर रूकना था पर तीनों की सहमति से आज नैनीताल ही रूकना तय हो गया। क्योकी ललित इससे पहले नैनीताल नही आया था , इसलिए वो नैनीताल मे ही घुमना चाहता था । हम वहां से नैनी झील व्यू प्वाईंट की तरफ निकल चले। तकरीबन दो-तीन किलोमीटर चलने पर ही हम वहां पहुंच गए। लेकिन मौसम ने हमारा साथ नही दिया, धुंध ज्यादा होने के कारण हमे वहां से नैनीझील के दर्शन नही हो पाए। मैं पहले भी
नैनीताल आ चुका हुं, तब मैं यहाँ पर भी आया था, तब मुझे यहां से नैनीझील के बहुत अच्छे दर्शन हुए थे। लेकिन आज धुंध के कारण हम उस नजारे को देख नही सके। हम लोग वहां से थोड़ी दूर ओर चले, आगे एक गांव दिखाई दिया, गाँव से पहले ही थोड़ी देर रूक कर हम वापिस नैनीताल की तरफ चल पड़े। थोड़ी से ही चले थे की एक मन्दिर दिखलाई दिया, हमने गाड़ी वही मन्दिर के पास ही खड़ी कर दी ओर चल पड़े मन्दिर के दर्शन करने के लिए, मन्दिर के आसपास बहुत धुंध थी, यहां पर हमारे वकील साहब एक चट्टान पर चढ़ गए, मैंने उनके फोटो खिंच लिए, ललित व प्रवीण जी यहां आकर खुश लग रहे थे। मन्दिर पर ही हमे दिल्ली के कुछ लड़के मिले, उन्होंने बताया की आगे एक गांव है, वहां जाईये बहुत खूबसूरत गांव है, वहां से आगे जाकर शानदार नजारे देखने को मिलते है, उन्होंने बताया की वह लोग जब भी नैनीताल आते है तो वहां जरूर जाते है। हमने उन्हें बताया की हम गांव तक जाकर वापिस लौट आए, कभी जब यहाँ आएँगे तब गाँव से आगे तक जाएँगे।
अब हम वापिस बारहपत्थर तिराहे पर पहुँचे, वहां से हम खुपराताल की तरफ जाते रास्ते पर मुड़ गए। कुछ दूर ही चले थे की घोड़े वाले खड़े थे, कहने लगे की आपको ऊपर पहाड़ी पर ले चलेंगे। पर हमने मना कर दी, हम उनसे थोड़ा आगे जाकर रूक गए। रूकते ही हमारे वकील साहेब(प्रवीण) एक ऊंचे पत्थर पर चढ़ गए ओर कहने लगे की चलो ऊपर की तरफ चलते है, उनके कहने पर मैं भी उनके साथ हो लिया पर ललित ने साफ मना कर दिया। हम दोनों उस पहाड़ी चढ़ते रहे। आगे आगे वकील साहब ओर उनके पिछे मैं। हम बढ़ते रहे। काफी देर बाद हम ऊपर एक पहाड़ी पर पहुँचे। यहां से नीचे देखने पर बहुत सुंदर दृश्य दिखाई दे रहा था, सर्पाकार सड़क दिखाई दे रही थी, आगे केवल सफेद धुंध ही धुंध नजर आ रही थी, हमे थोड़ा सा सांस भी चढ़ रहा था, क्योकी हम मैदानी लोगों को इस तरह की मेहनत की आदत नही है, ऊपर हमे एक पहाड़ी कच्चा रास्ता दिखाई दिया, हम उस पर चलने लगे, हम बिल्कुल उस पहाड़ी पर पहुँच गए, जहां पर नीचे घोड़े वाले खड़े थे, अब हम नीचे की तरफ वापिस उतरने लगे। थोड़ा सा ही उतरे थे की हमे नीचे ललित दिखलाई दिया, हमने वहीं से ललित को बहुत आवाजें दी, पर ललित ने एक ना सुनी, फिर हम पहाड़ी पर शार्ट कट मारते हुए नीचे उतर आए। ललित गुस्से मे था की तुम लोग इतनी देर कहां चले गए, हमने उसे बताया की ऊपर बहुत अच्छा लग रहा था, तब उसने कहां की ठीक है, अब जल्दी से होटल देख लो रात को रूकने के लिए, हम वापिस नैनीताल की तरफ चल पड़े, माल रोड पर कई होटल देखे, बाद मे होटल शालीमार मे एक कमरा ले लिया, कमरा साफ सुथरा था, तीन बेड पड़े थे। इस कमरा के हमे 1500 रू० देने पड़े। कमरे के बाहर बाल्कनी से झील व माल रोड पर चलने वालों की चहल पहल दिखाई दे रही थी। सामने ही अमर ऊजाला अखबार का दफ्तर था, गाड़ी से कपड़े व ओर समान उतार कर कमरे मे रख दिया। फिर मैं ओर वकील साहेब गाड़ी को पार्किंग मे खड़ी करने के लिए चले गए। शाम के छ: बज रहे थे, मॉल रोड पर लाईटे जल गई थी, हम पार्किंग में गाड़ी लगाकर, नैना देवी के मन्दिर चले गए, वहां से दर्शन करने के बाद हम होटल पहुँचे, लगभग शाम के सात बज रहे थे, कमरे में ही घुसते ललित ने गुस्से में कहा की तुम लोग अकेले घुम रहे हो, ओर मैं यहां पर तुम लोगों का इंतजार कर रहा था, उसको हमने बताया की पार्किंग के पास जाम लग गया था, इसलिए लेट हो गए थे, लेकिन हमारे माथे पर तिलक देखकर वह ओर भड़क गया। बोला की मन्दिर भी हो आए तुम तो। हम चुपचाप खड़े रहे, थोड़ी देर बाद ललित सामान्य हो गया, फिर हम तीनों मॉलरोड की तरफ चले गए। थोड़ी देर झील के किनारे बैठे, रात मे झील बहुत खूबसूरत दिखाई दे रही थी। झील में दूर पहाड़ी की लाईटो का प्रतिबिंब दिखाई दे रहा था, जो इसकी खूबसूरती को ओर भी बढ़ा रहा था, फिर हम एक रेस्ट्रोरेंट मे जाकर पेट पूजा कर आए, खाना खाने के बाद हम तीनों मॉल रोड पर घुमते रहे। ओर तकरीबन रात के दस बजे वापिस होटल आ गए। सभी ने घर फोन कर बता दिया की आज हम नैनीताल रूके है, फिर हम सब सोने के चले गए।
अब कुछ फोटो देखें जाए........
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बिरला स्कूल नैनीताल |
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बिरला स्कूल, कोहरे की वजहें फोटो साफ़ नहीं आया। |
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ललित शर्मा जी वही टीचर जिन्होंने हमारी हेल्प की थी। |
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वकील साहेब |
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यहाँ पर बहुत कोहरा था। |
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सार्थक जिसे हम देखने के लिए आये थे। |
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स्कूल से वापिस रोड पर आ गए ओर चल पड़े व्यू पोईन्ट की तरफ। |
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रास्ता और एकान्त |
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कुछ नज़र आया क्या |
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एक मंदिर जहा हम रुके थे। |
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मंदिर का दर्शय थोड़ा दूर से. |
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ललित , प्रवीन , सचिन |
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वकील साहब |
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अब नजर आए। |
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यही लोग हमे मंदिर पर मिले थे। |
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ललित |
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घने कोहरे की वजहें से हमे झील के दर्शन नहीं हो पाये। |
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कैप्शन जोड़ें |
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वकील साहब को चैन नहीं जॅहा देखो पहाड़ पर चढ़ जाते है। |
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चलो हम भी चलते है। |
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थोड़ा ऊपर पहुँचने पर ऐसा मौसम हो गया। |
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एक फोटो मेरा भी |
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ऊपर |
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एक रास्ता मिला। |
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एक फूल |
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एक फूल |
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एक फूल |
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मालरोड पर ललित ओर प्रवीन |
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मालरोड पर कुछ छोटी दुकानें |
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मालरोड पर बनी एक कलाकृति। |
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रात में झील |