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शनिवार, 21 नवंबर 2015

एक छोटी सी यात्रा(भीमताल)

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12, September, 2015
भीमताल के बारे मे.....
भीमताल झील कुमाऊँ की सबसे बड़ी झीलो मे से एक है। यह झील नैनीताल की झील से भी बड़ी है। यह झील समुंद्र तल से 1370 मीटर ऊँचाई पर बनी है, यह 1674 मीटर लम्बी व 447 मीटर चौड़ी है। गहराई के मामले मे यह कुमाऊँ की सबसे गहरी झील (नौकुचियाताल) से कुछ ही कम गहरी है। यह झील नैनीताल की नैनी झील से भी पुरानी है व कुछ विद्वानों ने इस झील का सम्बंध पांडु पुत्र भीम से भी जोड़ा है। कुछ लोगों का कहना है की पांडव यहां पर अपने वनबास के दौरान रहे ओर उन्होंने ही यहां पर इस झील का निर्माण किया था। इसलिए उसका नाम भीमताल पड़ा। कुछ लोगों का कहना है की यह झील बहुत बड़ी है इसलिए भी इसका नाम बलशाली भीम पर रख दिया गया होगा। झील के पास ही एक प्राचीन महादेव का मन्दिर है, जिसे पांडवो ने निर्माण किया बताया जाता है इसलिए यह भीमेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। इस झील पर एक बांध भी बना है, जिसमें से सिंचाई के लिए छोटी छोटी जलधारा निकलती है, जो बाद मे गौला नदी मे जाकर मिल जाती है। इस झील के चारो तरफ सड़क बनी है। जिन्हें मल्लीताल व तल्लीताल के नाम से जाना जाता है। भीमताल झील के बीचो बीच एक टापू बना है, जिस पर एक मछलीघर बना है, जहां पर पर्यटकों को देखने के लिए बहुत सी मछलीयां मिलती है। मछलीघर तक आपको नाव के द्वारा आना होता है। इस झील मे आप नोकाविहार भी कर सकते है।
भीमताल नैनीताल जितना विकसित तो नही है, पर यहां पर एक छोटा सा बाजार भी है, जहां पर हर जरूरत का समान मिल जाता है। रहने के लिए यहां पर छोटे बड़े सभी प्रकार के होटल मिल जाते हैं।
अब यात्रा वर्णन पर आते है...
सुबह सुबह नौकुचियाताल देखकर हम वापिस भीमताल आ जाते है। भीमताल पहुँच कर हमने सबसे पहले गाड़ी झील के किनारे ही लगा दी, जिस होटल मे रात हमने कमरा नही लिया था, उसी के सामने झील का सबसे अच्छा दृश्य दिख रहा था। हम तीनों यहां पर काफी देर तक बैठे रहे। फोटो खिचंते रहे ओर आगे की यात्रा पर बात करते रहे। मेने होटल के एक कर्मचारी से जान लिया था की यहां पर केवल यह झील व झील पर बना एक डैम ओर भीमेश्वर महादेव का मन्दिर है। इसलिए हम इन्हें भी देखना चाहते थे। ओर आज हमे अलमोडा होते हुए, बिनसर भी जाना था। इसलिए हमने यहां पर जाना कैंसिल कर दिया।
तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी, देखा तो घर से मेरे बड़े भाई का फोन था, उन्होंने मुझ से पूछा की कहां पर है मेने जवाब दिया की फिलहाल तो भीमताल हुं, बस थोड़ी देर बाद हम अलमोडा के लिए निकल रहे है। उन्होंने बताया की पहले नैनीताल चले जाना, वहां पर उनके दोस्त व हमारे पडौसी का लड़का एक स्कूल मे पढ़ता है। क्या नाम था स्कूल का...... हां बिड़ला स्कूल।
बड़े भाई ने आदेश दिया की उसकी तबियत खराब है, वो स्कूल के अस्पताल मे ऐडमिट है, उसे देख आना ओर उसके पिता को फोन कर उसका हालचाल बता देना, जिससे वह यह जान सके की उसको वही रहने दिया जाए या दिल्ली लाया जाए। मैंने कहा ठीक देख आऊंगा।
ललित भी कहने लगा की नैनीताल ही चलेंगे, क्योकी ललित भी यहां पर पहली बार आया था।
खैर हम तीनों भीमताल के एक कोने से दूसरे कोने पर बने अपने होटल पहुँचे। अब नल में गरम पानी भी आ रहा था, इसलिए हमने बिना देरी किये नहा-धौकर होटल के रेस्ट्रोरेंट मे पहुँचे। वहां पर हम तीनों ने आलू व प्याज के दो दो परांठे, दही संग खा लिए। परांठे खाकर व कमरे का बिल व टिप देकर हम वहां से नैनीताल की तरफ चल पड़े। भीमताल से नैनीताल लगभग 22km की दूरी पर स्थित है। भीमताल से हम पहले भवाली पहुचें। भवाली से एक रास्ता नैनीताल, दूसरा रास्ता रामगढ़ व मुक्तेश्वर को चला जाता है, एक रास्ता रानीखेत व अलमोडा को चला जाता है। भवाली मे कैंचीधाम नाम का एक मन्दिर भी है जो हाल ही मे बड़ा फैमस हो गया है। भीमताल से नैनीताल तक का रास्ता बड़ा ही सुंदर है, पहाड़ी घुमावदार रास्ता तो कही लम्बे लम्बे पेड़, तो कहीं पर दिखती धुंध से भरी खाई। छोटे छोटे खूबसूरत पहाड़ी फूल ओर हरियाली तो यहां पर कुदरत ने तोफहे मे दे ही रखी है। भीमताल से लेकर नैनीताल तक सड़क भी बेहतरीन बनी है, भवाली से निकलने के बाद बारिश होने लगी, पर यह बारिश जल्द ही थम भी गई। एक जगह हम रूके जहां पर धुंध ने रास्ता रोका हुआ था, जैसे मानो धुंध कह रही हो की आराम से चलो, चारों ओर नजारे ही नही मुझे भी महसूस करो। यहाँ से चलकर लगभग साढ़े दस पर हम नैनीताल जा पहुँचे।रास्ते के दौरान वकील साहब मेरे नैनिताल जाने के निर्णय पर थोड़ा नाराज भी हो गए थे, कहने लगे की हम अपने अपने घर से निकले है घुमने फिरने के लिए, इसलिए तुम्हारे बड़े भाई को तुम्हे नैनीताल जाने के लिए कहना ही नही चाहिए था। लेकिन बाद मे उनका मुड़ ठीक हो गया। क्योकी वह मुड़ खराब कर क्या करते, जब साथ थे, तो जाना तो पड़ता ही।
अब कुछ फोटो देखे जाएँ.......
भीमताल झील का दृश्य 
बतख़ जलक्रीड़ा करती हुई। 
एक साथी ओर आ गया। 
पूरा का पूरा झुँड 
झील और नाव 
झील के बीच बना टापू पर एक मछलीघर। 
एक फोटो अपना भी भीमताल झील पर। 
भवाली 
नैनीताल को जाता सुन्दर रोड, हरे भरे पेड व सर्पाकार सड़क। 
ललित 
प्रवीन (वकील साहब )
इस फोटो में बैकग्राउंड में कुछ नहीं दिख रहा है, जबकि यहां धुंध  ने एक खूबसूरत समां बांधा हुआ था। 
कुछ कुछ ऐसा ही। 
आगे धुंध ज्यादा है कृप्या धीरे चले ओर प्रकृति के नजारो को देखते चले। 

12 टिप्‍पणियां:

  1. भीमताल सुन्दर पिकनिक स्पॉट है, मै कई बार इसके किनारे-किनारे निकला हूँ... अभी हाल ही में 10 अक्टूबर 2015 को तुंगनाथ तथा बद्रीनाथ गया था तब भी यहाँ से होता हुआ गया हूँ, लेकिन कभी भीमताल पर रुका नहीं...! अपने अच्छी चित्रकारी की है तथा सुन्दर ब्लॉग लिखा है........!!!

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  2. सुंदर फोटो एक सुंदर पोस्ट

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  3. लाजबाब सचिन भाई ,बहुत सुंदर फोटो आये हैं |सचमुच खूबसूरती तो यहाँ कण कण में है |इसी जगह पर हम भी रुके थे, बस फर्क इतना रहा कि आप भीमताल से आते हुए हम भीमताल जाते हुए |

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    1. सही कहां भाई जगह बहुत खूबसूरत है।

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  4. beautifully written post and wonderful pics. keep sharing .

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  5. अपनी यात्रा की जानकारी साँझा करने के लिए धन्यवाद ।
    आपने भीमेश्वर महादेव और किसी डैम का जिक्र किया है यहाँ ।अगर उसके भी फ़ोटो यहाँ पोस्ट कर सके तो हम भी रूबरू हो सकेगे ।
    वकील बाबू लोग नाराज न करे ।हा हा हा

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  6. किसन जी माफ कीजिएगा हम इन दोनों जगह के बहुत नजदीकी होने के बावजूद जा ना सके।

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