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शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

ओरछा यात्रा (राम राजा मन्दिर व लाईट एंड साउंड शो)

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24 dec2016

बेतवा के तट से हम पैदल ही राम राजा मंदिर की तरफ चल दिए। ओरछा की एक बात मुझे अच्छी लगी की आप सारा ओरछा पैदल ही घूम सकते है। क्योकि सभी प्रसिद्ध जगह आस पास ही है। हम लोग शाम के लगभग 6:40 पर राम राजा मंदिर पहुँच गए। मंदिर के बाहर सड़क पर प्रसाद व फूलो की दुकाने लगी थी। एक दूकान से मैंने भी प्रसाद व फूल ले लिए। दुकान वाले ने बताया की पहले ओरछा में राम की आरती होती है, फिर अयोध्या में होती है। पता नहीं उसकी बात में कुछ सच्चाई भी है या नहीं। मै प्रसाद ले कर मंदिर के मुख्य द्वार पर पंहुचा। फिर हम सब जब अंदर चले तो वहाँ सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस के एक सिपाही ने जींस से बेल्ट उतारने को बोला। क्योकि बेल्ट पहन कर अंदर जाना वर्जित है। क्योकि यहाँ राम को राजा के रूप में देखा जाता है और राजा के सामने कमर कसकर नहीं जाते है। बेल्ट वही एक खम्बे पर बांध कर अंदर चले गए। मंदिर के अंदर अभी आरती चल रही थी। दर्शन के लिए दो लाइन लगी हुई थी, एक महिला व दूसरी पुरुष के लिए। धक्का मुक्की ना हो इसलिए लोहे के पाइप लगे है। लकिन अगर आपको केवल भगवान राम के दर्शन ही करने है तो आप मुख्य कक्ष के सामने खुली जगह पर आराम से खड़े हो कर राम राजा के दर्शन कर सकते है।

ग्रुप की सभी महिलाये दर्शन के लिए लाइन में लग गयी और हम सभी ने खाली जगह से ही दर्शन कर लिए। अब समय 7:20 से ऊपर हो चूका था अभी भी महिलाओ को दर्शन नहीं हुए थे। उधर पांडेय जी लाइट एंड साउंड शो पर चलने के लिए बोलने लगे। जो मंदिर के सामने जहांगीर महल में शाम के 7:30 पर शरू हो जाता है। उधर ग्रुप की महिलायो ने बोल दिया की वह दर्शन करने के बाद ही लाइट एंड साउंड शो देखने जाएंगी। इसलिए मैं और दो और साथी वही मंदिर में रुक गए और बाकि शो देखने को चले गए। हम भी दूसरी लाइन में लग गए तभी देखा की मंदिर का एक कर्मचारी एक व्यक्ति को बहुत जोर से धमका रहा है और उसको दो चार थप्पड़ भी लगा दिए है। मैंने एक व्यक्ति से पूछा की मंदिर में यह क्या हो रहा है तो उसने बताया की मंदिर में किसी भी तरह की फोटोग्राफी मना है और उस व्यक्ति ने मंदिर में फोटो या सेल्फी खीच ली है। ये देखकर अच्छा नहीं लगा क्योकि आप नियम तोड़ने वाले को मार नहीं सकते हो। या तो उसकी फोटो डिलिट कर दो या फिर उस पर जुर्माना लगा दो। लकिन आप उसे मार नहीं सकते हो। हम लोगो ने भी श्री राम के दर्शन किये , पीने को चरणामृत मिला और बाहर आ गए।

राम राजा मंदिर की कहानी :-  मौजूदा मंदिर व उस समय का राज महल को ओरछा के राजा मधुकर शाह (संवत 1554-92 ) ने बनवाया था। कहानी या कहे की इतिहास यह है की राजा मधुकर शाह कृष्ण भक्त थे और उनकी पत्नी गणेश कुँवारी महा रामभक्त थी। एक बार मधुकर शाह ने रानी गणेश कुँवारी को अपने साथ बृज यात्रा पर चलने को कहा लकिन रानी ने अयोध्या जाने की बात बोली जिसे सुनकर मधुकर शाह को बहुत गुस्सा आ गया। उन्होंने रानी को आदेश दे दिया की अगर तुम इतनी बड़ी राम भक्त हो तो राम को ओरछा ले कर ही आना नहीं तो ओरछा नहीं आना। रानी राम को लेने अयोध्या आ गयी। लकिन राम ने दर्शन नहीं दिए। एक दिन उन्होंने अपनी ही भक्ति में कमी जानकर अयोध्या की सरयू नदी में छलांग लगा दी। और पानी में डूब गयी लकिन होना कुछ और था। जल के अंदर श्री राम ने बाल रूप में रानी को दर्शन दिए। और एक वरदान मांगने को कहा। तब रानी ने कहा की वह तो आपको ही लेने ओरछा से अयोध्या आयी है और आपको लेकर ही वापिस जायगी। राम ने कहा की वह बाल रूप में ही जायँगे और राजा बनकर ही जायँगे। साथ में एक बार जहां वह स्थापित हो गए फिर वही रहेंगे। रानी ने सभी शर्तो को स्वीकार कर लिया। रानी ने यह सन्देश ओरछा पंहुचा दिया। राजा मधुकर शाह ने राम के लिए चतुर्भुज मंदिर का निर्माण चालू करा दिया। जब राम ओरछा आये तब चतुर्भुज मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हुआ था। इसलिए राम की मूर्ति राजमहल में ही रख दी। जब चतुर्भुज मंदिर का निर्माण पूरा हुआ और राम की मूर्ति को राजमहल से हटाकर ,चतुर्भुज मंदिर में स्थापित करना चाहा तो राम की मूर्ति अपनी जगह से हिली भी नहीं। तब राजा और रानी को राम की वह शर्त याद आ गयी की जहाँ रख दिया वही स्थापित हो जाऊंगा। इसलिए राजा ने चतुर्भुज मंदिर में श्री कृष्ण की मूर्ति स्थापित की। आज भी ओरछा में राम को राजा के रूप में पूजा जाता है। 

हम सभी जहाँगीर महल पहुच गए। गेट पर ही मुकेश पांडेय जी मिल गए। उन्होंने बता दिया की इस तरफ जाना है। काफी अँधेरा था और एक भारी और स्पष्ट आवाज चारो तरफ गूँज रही थी। ओरछा का पूरा इतिहास बताया जा रहा था। सभी की कहानी बताई जा रही थी। घोड़ो की चलने की आवाज व शेर के दहाड़ने की आवाज ऐसे लग रही थी जैसे हम उसी काल में पहुच गए हो। हम केवल आवाज और लाइट को देख और सुन रहे थे। और इतिहास को जान रहे थे। इस शो में शामिल होकर बहुत अच्छा लगा। इसलिए मुकेश पांडेय जी को बहुत बहुत धन्यवाद करता हू। जब शो आपने अंतिम भाग में था तब मेरे बेटे को भूख लग गयी। इसलिए हम किले के बाहर बने एक होटल पर गये और खाने के लिए दाल रोटी माँगा ली और खाना खाने के बाद होटल पहुच गए। आज पूरा दिन घूमने का ही रहा इसलिए अब शरीर में थकावट का एहसास होने लगा था। कुछ देर दोस्तों के बीच बैठकर मैं सोने के लिए आपने रूम में चला गया। 

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अब कुछ फोटो देखे जाये ...... 


ओरछा का राम राजा मंदिर का बाहरी हिस्सा 


मंदिर परिसर में सुन्दर फंवारा 

देवांग 
मैं सचिन त्यागी ओरछा के राम राजा मंदिर पर। 


ओरछा महल पर लाइट एंड साउंड शो के दौरान लाइटिंग 

ओरछा महल पर लाइट एंड साउंड शो के दौरान लाइटिंग

ओरछा महल पर लाइट एंड साउंड शो के दौरान लाइटिंग

ओरछा महल पर लाइट एंड साउंड शो के दौरान लाइटिंग

ओरछा महल पर लाइट एंड साउंड शो के दौरान लाइटिंग



13 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा लेख त्यागी जी....

    आपके साथ हम भी अतीत में जाकर उन्ही पलो को फिर से याद कर लिया .

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    1. धन्यवाद रितेश भाई। वो पल हमेशा याद रहेंगे ।

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  2. अच्छा लेख त्यागी सुंदर वर्णन

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  3. बहुत सुन्दर, सचिन भाई धन्यवाद

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  4. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ... शानदार पोस्ट .... Nice article with awesome depiction!! :) :)

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  5. ओरछा जैसी तुलनात्मक रूप से छोटी जगह में इतना कुछ है कि एक बड़े शहर में होने की गुंजाईश नहीं है ! लाइट & साउंड शो बेहतर रहा ! कभी अवसर मिला तो ओरछा को और जानने की कोशिश करेंगे

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    1. जी योगी भाई ओरछा में बहुत कुछ है देखने के लिए । धन्यवाद पोस्ट पंसद करने के लिए।

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