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Friday, March 14, 2014

मेरी कश्मीर यात्रा

यह यात्रा मेने 30 दि०2012 को की थी.मे ओर गौरव( बुआ का लडका)एक दिन बात कर रहे थे की नए साल पर कही चला जाए.उसने कहा की मनाली चलते है,वो कहने लगा की उसने कभी बर्फ नही देखी है तो मनाली सही जगह होगी पर मेने उस से कहा की चलो कश्मीर चलते है,मै भी अभी तक कश्मीर नही गया था इसलिए मन था वहां जाने का ओर मेरे जीजाजी राहुल जी भी अभी हाल मे कश्मीर हो कर आए थे.फोटो ओर उनकी यात्रा वृतान्त सुनकर,मन मे था की अब की बार कश्मीर चला जाए ओर बर्फ भी पड रही थी वहा,तो गौरव ने कश्मीर चलने की हामी भर दी.गौरव ने अपने दोस्त अतुल से कश्मीर की हवाईजहाज की टिकेट को बोल दिया.मुझे बाद मे पता चला की हमारे साथ अतुल भी जा रहा है.तो आखिर हम तीन बंदे 30दि०2012 की सुबह 6:40 की फ्लाईट से श्रीनगर जा रहेथे.
मै ओर गौरव 29 की रात को अतुल के घर पहुंच गए .क्योकी उसका घर एयरपोर्ट के सबसे नजदीक था ओर सुबह तीनो साथ ही निकल पडेगे.सुबह एयरपोर्ट जाने के लिए गौरव ने एक  दोस्त को कह दिया की वह आज ही अपनी कार अतुल के घर लेते आए.तो हम सभी बाजार गए अपनी जरूरत का समान लेने?मेने ग्लब्स् लिए ,गौरव ने बैग लिया व कुछ गर्म कपडे भी लिए.हम चारो(कार वाला दोस्त भी) खाना खाकर सो गए.ओर सुबह 4बजे उठ कर फ्रैश होकर,एयरपोर्ट की तरफ चल दिए पर काफी कोहरा होने की वजह से सुबह5:45 पर एयरपोर्ट पहुंचे. जल्दी जल्दी भागे ओर बोर्डिग पास बनवाकर,कुछ ओर  जरूरी सुरक्षा कार्यवाही का सामना करते हुए जेटएयरवेज की बस मे बैठ गए.बस ने हमे हवाईजहाज के नजदीक उतार दिया.हम जल्द ही  हवाईजहाज मे अपनी  अपनी सीट पर बैठ गए.हम तीनो ही  पहली बार ही हवाई यात्रा कर रहे थे इसलिए बहुत उत्साहित हो रहे थे की यह कब उडे पर तभी एक घोषणा हुई की मौसम साफ ना होने के कारण अभी हवाईजहाज को उडने के लिए सिग्नल नही मिल रहा है तो हम सोचने लगे कही यह फ्लाईट कैन्सील न हो जाए.यात्रा विलम्ब होने के कारण एयरहोसट्स ने सभी यात्रीयो को खाने के लिए नूडल्स दिए,आखिरकार दोपहर 12 बजे सिग्नल मिलते ही हमारा प्लेन उड चला.उडने के कुछ सेकिंडो मे हम काफी ऊचांई पर पहुंच गए जहां से दिल्ली छोटी नजर आने लगी ओर दूर पहाडीया बर्फ से ढकी नजर आने लगी.कुछ देर मे ही घोषणा हुई की हम श्रीनगर उतरने वाले है ओर बादलो तो चीरते हुए हम नीचे की ओर उतरने लगे.बाहर का तापमान दिल्ली के बराबर ही था.हम एक घण्टे मे ही दिल्ली से श्रीनगर पहुंच गए थे. यह सफर बहुत जल्दी ही कट गया क्योकी हम तीनो मे ही खिडकी की तरफ बैठने की होड लगी थी.ओर बारी बारी से बैठ गए.श्रीनगर उतर कर कर अतुल के चाचा के लडके का फोन आया की वह कहां है तो अतुल ने कहा जबाब दिया श्रीनगर एयरपोर्ट पर हुं तो उसने कहा की मै श्रीनगर डलगेट पर ही तैनात हुं (वह BSF मे है)उसने बताया की टैक्सी लेकर डलगेट पर न्यु ममता होटल है वहा आ जाओ.हम दो घन्टे बाद डलगेट पहुंच गए.उसने हमे देखते ही खुशी से हमारा स्वागत किया ओर अन्य फौजियो से भी मिलवाया.फिर हमने होटल ममता मे ही कमरा ले लिया ओर बाहर डल झील की तरफ घुमने चल दिए.एक आटो किया 500 रूपयो मे उसने हमे डल झील का पूरा चक्कर लगवाया व निशांत बाग व मुगल गार्डन भी घुमाया पर सर्दियो मे हरियाली नाम को भी नही थी,फिर हम हजरतबल मस्जिद मे भी गए. यह डल झील के पास ही है ओर वहा हमने हलवा ओर पापड जैसा कुछ खाया पर स्वाद नही लगा जबकी आटो वाला वसीम भाई ने बताया की यह यहा का बहुत खास मिष्ठान है रात के 8 बज गए थे ओर सर्दी भी लग रही थी इसलिए हम वापिस होटल मे आ गए.वहा फौजी भाई हमारा इन्तजार करते मिले ओर उनसे बात होती रही.उन्होने बताया की यहा पत्थरबाजी कब हो जाए पता नही चलता ओर जुम्मे के दिन तो एक दो घटना होना आम बात है पर अब यहा शान्ति है.रात के दस बज चुके थे इसलिए भूख भी जोरो से लग रही थी होटल मे नीचे मारवाडी थाली मिलती थी शायद 150 रूपयो मे ,वो खाई ओर सोने के लिए कमरे मे चले गए

यात्रा अभी जारी है........

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