हम यमुनोत्री यात्रा कर आगे उत्तरकाशी में रुकें। हमने यहां goibbo app की मदद से पहले ही एक होटल बुक करा लिया था। लेकिन वह होटल हमे काफी ढूंढने पर भी नही मिला, गूगल मैप से भी ढूंढा तब भी लोकेशन गलत ही बता रहा था। हमने काफी बार फ़ोन भी किया तब भी फ़ोन उठाया नही गया फिर मैंने दूसरे नम्बर से फ़ोन किया तब उन्होंने फ़ोन उठाया लेकिन रूम बुक होने से साफ इंकार कर दिया जबकि हमने goibbo को पैसे भी दे दिए थे। हमारे लगभग 2 घंटे उधर ऐसे ही खराब हो चुके थे। फिर हमने goibbo पर शिकायत कर दी और उत्तरकाशी से कुछ आगे गंगा किनारे एक होटल शिव गंगा व्यू में रूम ले लिया। कुछ देर बाद goibbo की तरफ से एक कॉल आयी और उन्होंने इस प्रकरण के लिए माफी भी मांगी तथा मेरे पैसे भी रिफंड करने का आश्वासन दिया।
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गंगोत्री धाम ,उत्तराखंड |
30 मई 2019
अगली सुबह जल्दी ही आँखे खुल गयी क्योंकि रात जिस होटल में हम ठहरे थे, वह भागीरथी नदी(गंगा) के किनारे था और नदी की तरफ से आता जल का शोर सुबह सुबह बड़ा ही सुरीला लग रहा था। बाकी उठने में रही सही कसर प्रकृति के अलार्म ने पूरी कर दी थी? जी हां मैं बात कर रहा हूँ, उन पक्षियों जो कि सुबह से ही रूम के आस पास उड़ते हुए चहक रहे थे। कल रात हम नदी के किनारे जिन पत्थरों पर बैठे थे वो भी अब पानी मे डूब चुके थे इसका मतलब यह था कि आज नदी में पानी बढ़ गया था। होटल से सुबह के कई मनमोहक नज़ारे दिख रहे थे। सुंदर दृश्य जैसे बहता हुआ जल, पक्षियों की चहचहाना, सामने पहाड़ आदि यह सभी आनंद को दोगुना कर रहे थे और कल जो हमारे साथ goibbo होटल वाला प्रकरण हुआ उसे भी अब हम भुला चुके थे।
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देवांग रूम की खिड़की से बाहर की तरफ देखता हुआ
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भागीरथी नदी ,उत्तरकाशी
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गंगोत्री के लिए प्रस्थान
सुबह होटल में ही नाश्ता किया, होटल की सर्विस भी अच्छी लगी और लगभग 7 बजे हम गंगोत्री यात्रा पर निकल पड़े। कुछ किलोमीटर चलने पर ही हमे एक चौकी पर रोक लिया गया, यहाँ पर चार धाम यात्री पंजीकरण भी हो रहा था लेकिन हमसे सिर्फ कार के कागज व कितने यात्री है साथ मे मेरा फ़ोन नम्बर लिया गया। अब हम यहाँ से आगे चल पड़े। सुबह- सुबह भी सड़क पर काफी गाड़िया जाती हुई दिख रही थी कुछ ही समय मे हम मनेरी पहुँच गए। मनेरी में भागीरथी नदी पर एक डेम बना है जिससे बिजली बनाई जाती है। मनेरी में देखने के लिए एक खेड़ी नाम से झरना भी है। मनेरी से तक़रीबन आठ किलोमीटर चलने पर सड़क मार्ग पर व गंगा किनारे एक बड़ा आश्रम बना है। जिसमे शिव आदि देवताओं की बड़ी बड़ी प्रतिमाएं लगी हुई थी। यहां पर लोग रुक कर फ़ोटो आदि ले रहे थे। यह पायलट बाबा का आश्रम नाम से प्रसिद्ध है। हम यहाँ नही रुके और मैं रास्तो के फोटो भी नही ले पा रहा था क्योंकि कार मैं ही चला रहा था। पायलट बाबा के आश्रम से 9km आगे चलने पर भटवारी नाम का कस्बा आता है। यहाँ पर कुछ होटल व दुकानें देखने को मिली। भटवारी से एक रास्ता बरशु के लिए चला जाता है। बरशु से ही आगे दायरा बुग्याल के लिए ट्रैकिंग की जाती है।
भटवारी से 16 km आगे गंगनानी जगह पड़ती है। यहाँ पर हमें काफी जाम मिला। गंगनानी से कुछ किलोमीटर पहले ही लोगो ने अपनी कार, बस आदि रोड के साइड में खड़ी की हुई थी इसलिए ट्रैफिक थोड़ा स्लो चल रहा था हमे लगभग आधा घंटा गंगनानी को पार करने में लग गया। हम गंगनानी जरूर रुकते लेकिन भीड़ व जाम की वजह से आते वक्त देखंगे यह डिसाइड हुआ। वैसे गंगनानी में गर्म पानी के कुंड है साथ मे एक दो मंदिर भी है। इसलिए यात्री गंगनानी जाते है। उत्तरकाशी से गंगनानी तक हम भागीरथी के किनारे किनारे बनी सड़क पर ही चल रहे थे। यह रास्ता बहुत सुंदरता समेटे हुए है। दूर तक फैली घाटी, नदी, जंगल पूरे रास्ते आपका साथ नही छोड़ते है। गंगनानी से कुछ आगे चलकर नदी का रास्ता छोड़ हमे ऊंचाई वाला व बहुत से मोड़ो वाले रास्ते पर चलना होता है। अब हम उसी रास्ते पर चल रहे थे। यह पहाड़ी ऊंचाई वाला रास्ता सुक्खी टॉप तक जाता है फिर हमे वापिस ऐसे ही रास्ते से नीचे भी उतरना होता है। इसका मतलब घाटी के बीच यह पहाड़ आ जाता है जिसको हमे पार कर फिर से घाटी में उतरना होता है। सुक्खी टॉप पहुँचने व वहाँ से उतरने तक हमे बहुत लंबा जाम मिला। लेकिन सुक्खी टॉप पर पहुँच कर और उधर से दिखती गंगा घाटी का सुंदर दृश्य सारी निराशा को दूर कर देता है। ऊंचे ऊंचे पहाड़ बीच से बहती गंगा नदी और दूर आखिरी में दिखते हिम शिखर। यह दृश्य हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे। सुक्खी टॉप से उतरने के बाद हम एक बार फिर भागीरथी नदी के साथ साथ चल रहे थे। लगभग 15 किलोमीटर आगे चलने पर देवदार के घने जंगल के बीच से एक रास्ता बाँये तरफ अलग चला जाता है यह रास्ता हर्षिल के लिए जाता है। हर्षिल वैली अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। एक पुरानी फ़िल्म राम तेरी गंगा मैली जिसे राजकपूर साहब ने बनाया था उसकी ज्यादातर शूटिंग भी यहाँ हर्षिल में ही हुई थी। साथ में हर्षिल वैली अपने सेब के लिए भी जानी जाती है।
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सुक्खी टॉप पर लगा वाहनों का ट्रेफिक जाम |
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यह रास्ते कितने खूबसूरत है |
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टॉप से दिखती हिमालय की पर्वत श्रेणी |
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सुक्खी टॉप से दिखती गंगा की घाटी |
चूंकि हमे गंगोत्री जाना था इसलिए हम आगे बढ़ गए। थोड़ी दूर चलते ही सड़क पर बहुत पानी बह रहा था साथ मे कई जगह से पानी आ रहा था। ट्रेफिक भी रुका हुआ था। एक तरफ का ही ट्रैफिक चल रहा था। इसी जगह पर थोड़ा पैदल चल कर एक वाटरफॉल भी है जिसको मंदाकिनी वाटर फॉल कहते है। अब मेरी तरफ वाला ट्रैफिक चल पड़ा था और मैंने इस उबड़ खाबड़ वाले रास्ते को बड़ी सावधानी से पार किया। कुछ आगे चलने पर बाँये तरफ नदी के दूसरी तरफ थोड़ा ऊँचाई पर एक सफेद मंदिर दिख रहा था। मैंने आगे एक जगह गाड़ी रोकी इस जगह का नाम धराली या धरली था इधर मेरे पूछने पर एक व्यक्ति ने बताया कि यह मंदिर जो आप देख रहे हो वह मुखबा गांव में है और जब शीतकालीन समय में गंगोत्री धाम के कपाट बंद हो जाते है तब यहाँ पर ही माँ गंगा की पूजा होती है। धराली से 14 किलोमीटर आगे चलने पर भैरोघाटी शुरू हो जाती है एक ब्रिज(भैरो ब्रिज) जो भागीरथी पर ही बना है उसको पार करते ही दाँये तरफ बाबा भैरो नाथ का प्राचीन मंदिर बना है, कहते है कि गंगोत्री धाम के साथ यहाँ भी दर्शन करने चाहिए। भैरो मंदिर से गंगोत्री धाम तक कि दूरी लगभग आठ किलोमीटर ही रह जाती है और यह आठ किलोमीटर का रास्ता बेहद खूबसूरत है। वैसे तो सुक्खी टॉप से ही गगनचुंबी हिमालय की चोटियों के बीच बीच में नयनाभिराम दर्शन होते रहते है लेकिन इस सड़क से हिमालय की चोटियां काफी नजदीक दिखती रहती है और अगर आपके हाथ में कैमरा है तब आप रुक कर जरूर इनका फोटो लेंगे।
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भगीरथी शिला |
भागीरथी शिला देखने के पश्चात हमने गंगा किनारे एक होटल में खाना खाया और आगे
सूर्यकुंड व
गौरीकुंड देखने के लिए चल पड़े। सबसे पहले सूर्यकुंड आता है, सूर्यकुंड को पहली ही नज़र से देखना बेहद ही रोमांचित करने वाला अहसास होता है। सूर्यकुंड के खास तरह के पत्थरों व उन पर जल के कटाव के निशानों में से पूरी भागीरथी नदी को एक धारा के रूप में निकलते देखना बड़ा ही अच्छा लगता है। यहां पर नदी बहुत शोर करती हुई और गहराई में बहती है। कहा जाता है कि राजा भगीरथ ने इस जगह पर सूर्य को जल अर्पित किया था इसलिए आज भी गंगा नदी सूर्य को नमस्कार करती हुई सी प्रतीत होती दिखती है। सूर्य कुंड से कुछ दूरी के फासले पर ही गौरीकुंड है। गौरीकुंड कोई कुंड नही है लेकिन यहाँ पर गंगा नदी बहुत नीचे गहराई में बहती दिखती है कहा जाता है कि जब गंगा धरती पर बड़े वेग से उतरी तब शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में बांध लिया और अपनी एक जटा यही गौरीकुंड में खोली जिससे गंगा आराम से धरती पर उतरी।
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