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Thursday, April 3, 2014

वेष्णों देवी यात्रा(2012)

22apr2012, को मै,मेरी पत्नी व मेरा बेटा देवांग को माता के यहां से बुलावा आ गया दर्शन के लिए इसलिए हम शाम को 6 बजे अपनी कार से वेष्णो देवी के दर्शन के लिए निकल पडे,मेने कार चलाने के लिए ड्रायवर को भी बोल दिया,हम अपनी कार से आराम से 23 की सुबह 6बजे तक कटरा पहुंच गए.वही एक होटल मे कमरा लेकर रूक गए.क्योकी हमे दर्शन के लिए कल सुबह जाना था वो इसलिए की देवांग बहुत छोटा था.ओर रात को चलने मे असमर्थ होता.

माता वेष्णो देवी त्रिकुट पहाड पर विराजमान हे,कटरा से माता का भवन लगभग15 किलोमीटर दूरी पर स्थित है.ओर पैदल चढाई वाला रास्ता हे.यहां हेलीकाप्टर से भी दर्शन कराए जाते है जो सांझीछत पर बने हैलीपैड तक जाता है वहा से भवन तक पैदल जाया जाता है

अगले दिन24 की सुबह 8बजे हम माता के दर्शन के लिए चल दिए.मेन चौक पर ही यात्रा पर्ची काऊंटर है जहा से आप यात्रा पर्ची प्राप्त कर सकते है जो रास्ते मे कई जगह दिखानी पडती है पर्ची के बिना आप दर्शन नही कर सकते है हमने भी पर्ची ली ओर चल पडे दर्शन के लिए.

माता के भवन तक पैदल यात्रा में सबसे पहले पड़ती है बाणगंगा।कहते हे की जब  भैरोनाथ माता (कन्या) पिछे पडा था तब हनुमान जी जो माता के साथ थे उन्हे प्यास लगी तो माता ने यहा पर धनुष से बाण चलाया ओर धरती से फूटी जलधारा से हनुमान जी की प्यास बुझाई व माता ने यहां पर अपने केशो को भी धोया.
आज भी भक्त यहा पर नहाते है फिर अपनी यात्रा आगे  बढ़ाते है।यहा हम नहाए तो नही पर बाणगंगा को  प्रणाम कर आगे चल दिए.

आगे चलने पर चरणपादुका मन्दिर आता हे.यहा पर माता ने एक पत्थर पर चढकर पिछे आते भैरोनाथ को मुडकर देखा था,उस पत्थर पर माता के चरणो के निशान बन गए जिनकी आजतक भी पुजा होती है.
हमने भी चरण पादुका मन्दिर के दर्शन किए ओर चल पडे भवन की तरफ,यहा से हमने एक पिठ्ठू कर लिया देवांग के लिए क्योकी देवांग तीन साल से भी कम का था ओर कब गोदी मे चलने के लिए कह दे.पर देवांग ज्यादातर पैदल ही चला.

अब हम पहुंचे अर्द्धकुवांरी मन्दिर पर, ऐसा मानना है की माता जी ने इस गुफा मे नौ महिने आराम किया था.यहा पर दर्शन के लिए ऊपर भवन से भी ज्यादा भीड रहती है.
यही से भवन के लिए दो रास्ते अलग अलग चले जाते है एक हाथी मथ्था होकर व एक नया मार्ग जिस पर बैटरी वाले आटो भी चलते है यहा से भवन 6/7 किलोमीटर रह जाता है,हम नए रास्ते से चल दिए जो ज्यादा चढाई वाला नही है।यही पर हमने पिठ्ठू वाले को 200रू० देकर उसे राम राम कह दी।मतलब वह केवल अर्द्धकुंवारी तक ही किया था।ओर देवांग भी पैदल चलना ही ज्यादा पसंद कर रहा था।इसलिए वह नीचे की ओर चला गया ओर हम भवन की ओर चल पड़े।

रास्ते मे कोल्डड्रिक, आइसक्रिम की दुकाने है व कॉफी के स्टाल लगे है।जहां पर आप पैदल यात्रा की थकान कुछ देर चाय/कॉफी संग उतार सकते है,कुछ अन्य समान की दुकानें भी है,जहां खाने पीने का समान आपको उचित रेट पर मिल जाती है।

हम दोपहर 1बजे ऊपर भवन पर पहुच गए.यहा सभी भक्त प्राकृतिक रूप से आता ठंडे पानी मे नहाने के बाद नए कपडे पहन कर माता के दर्शन के लिए जाते है हम भी पहले नहाए ओर फिर क्लॉकरूम मे कपडे,मोबाईल,केमरा व चमडे से बनी कोई भी वस्तु जो भवन मे नही ले जा सकते , क्लाकरूम रख दी. प्रसाद की दुकान पर पहुंच कर प्रसाद ले लिया गया.ओर भवन को जाने वाले रास्ते पर चल दिए.

माता वेष्णोदेवी यहा पर तीन पिन्डीयो मे विराजमान है पहली माता सरस्वती व दूसरी महालक्षमी व तीसरी महाकाली,ये तीनो ही मां वेष्णो देवी के रूप है यह कहा जाता है की भैरोनाथ माता का पिछा कर रहा था तब मां यही इस गुफा मे आ गई ओर बाहर हनुमान जी पहरा दे रहे थे की तभी वहा भैरोनाथ आ गया ओर गुफा मे जाने लगा तब भैरोनाथ व हनुमान जी मे युद्ध होने लगा.तभी माता रानी गुफा से बाहर आई और अपनी शक्ति से भैरोनाथ(भैरवनाथ)का सिर धड से अलग कर दिया.भैरव नाथ का सिर गुफा से दो किलोमीटर ऊपर पहाडी पर गिरा.भैरव नाथ ने माता से विनती की मुझे छमा करे ओर मेरा कल्याण करे तब माता ने उसे वरदान दिया की जो भक्त मेरे दर्शन करने के बाद तेरे दर्शन करेगा तभी उसकी यात्रा पूर्ण मानी जाएगी.

हम भवन(गुफा) पर पहुच गए,पुरानी गुफा का रास्ता बंद था पर बाहर से दर्शन कर सकते थे माता के दर्शन के लिए एक नई गुफा बनाई हुई है जहा से अब माता के दर्शन होते हे.
जब हम दर्शन के लिए पहुंचे तो वहा कोई नही था हमने खुब अच्छी तरह से माता के दर्शन किए।माता को निहारा,कहते है की माता यहां पर आज भी विराजमान है।इन पिंडीयो के रूप मे।माता के दर्शन करने के बाद हम बाहर आ गए.बाहर हमे एक छोटी सी पन्नी मे मिश्री व चांदी का सिक्का मिला.
भवन से निकलने के बाद एक ओर गुफा मे भगवान शिव भी विराजमान थे उनको भी नमस्कांर किया।यहां पर एक छोटा सा कुंड था जिसमें लोगों ने एक/दो रू० के सिक्के डाले हुए थे।हमने यह बात समझ नही आई की यह पैसे यहां क्यों डाले हुए है।शिव के दर्शन कर हम बाहर आ गए.
क्लॉकरूम से समान लेकर चल पडे भैरवनाथ के दर्शन के लिए क्योकी उनके दर्शन के बिना तो यह यात्रा अधुरी है.

भैरोनाथ मन्दिर तक चढाई थोडी खडी चढाई है पर हमारा देवांग तो यहा भी आगे ही आगे रहा,पता नही इतनी शक्ति उसमे कहां से आ गई थी.आखिरकार हम शाम के तकरीबन 3:30 पर भैरोनाथ पहुंच गए,यहा पर भी भीड ज्यादा न होने के कारण दर्शन जल्दी हो गए.

भैरोनाथ मन्दिर के पास ही कैंटीन है जहां पर हमने खाना खाया ओर देवांग के लिए एक ग्लास गरम दुध भी ले लिया.

शाम को 5बजे के आसपास हम नीचे की तरफ चल दिए.तभी ठंडी ठंडी हवाए चलने लगी ओर बारिश पडनी चालू हो गई.हम एक टिनशैड के नीचे बैठ गए.थोडी देर बाद बारिश रूक गई तो हम भी चल दिए.
अर्द्धकुवांरी पर पहुच कर थोडा आराम किया ओर यहा पर दर्शन करने के लिए गए तो पता चला की कल की पर्ची वालो को आज दर्शन हो रहे है आप का नम्बर कल शाम तक आएगा तब हम वहा से चल दिए अब अंधेरा चारो तरफ फैल चुका था पर रास्ते मे लाईट कदम कदम पर लगी हुई है जिससे भक्तजनो को कोई कठनाई नही होती है.

देवांग थक हार कर अर्द्धकुवांरी मन्दिर पर सो गया.जो मेरी गोद मे था,आज देवांग भी लगभग 16/17 किलोमीटर पैदल चल चुका था जो बच्चो के लिए बहुत बडी बात है,पुरे रास्ते मै ही उसे लेकर आ रहा था ओर बारिश की वजह से फिसलन भी हो रही थी व अब रात को ऊपर भवन पर जाने वाले भी बढ गए थे जिससे मै बडे ध्यान से निचे उतर रहा था.जिस कारण मेरे पैर के पंजो मे दर्द होने लगा.पर हम उतरते रहे और रात को 10:30 बजे नीचे उतर आए.एक आटो लिया ओर होटल मे आकर सौ गए.

25 की सुबह आराम से ऊठे.नहाधौकर,होटल का बिल चुकता कर,कटरा के बाजार मे घुमे,अखरोट व अन्य समान लिया.ओर खाना खाकर दोपहर 12बजे के आसपास कटरा से चल दिए,रास्ते मे जम्मू के रघुनाथ मन्दिर मे भी दर्शन किये ओर 26 की सुबह6 बजे हम दिल्ली अपने घर आ गए.

जय माता दी......

यात्रा समाप्त......

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