14 अगस्त 2016
हम सुबह 6 बजे ऊठ गए, खिडकी खोल कर बाहर देखा तो अभी सडक पर कोई चहल पहल होती नही दिख रही थी, होटल से कुछ दूर एक छत पर कुछ बंदर उछल कूद कर रहे थे। पहाडी कौए भी इधर से उधर उड रहे थे, सामने के पहाडी पर कुछ बादल से उमड उमड कर आ रहे थे, यह सब देख कर मन को अच्छा लगा रहा था, यहां पर ना किसी बात की जल्दी थी ना ही किसी बात की फिक्र। लगभग 6:30 पर होटल के एक वेटर को कह दिया की आलू के परांठे व चाय 7 बजे तक ले आना। देवांग कैमरा ऊठाकर खिडकी के पास जा बैठा, कुछ फोटो खींचे उसने। वह खुश था यहां आकर व इन पहाडो को देखकर।
सुबह हम फ्रेश होकर व अपना बैग पैक कर के तैयार हो गए। लगभग 7:15 पर वेटर चाय व परांठे लेकर आ गया। सुबह चाय परांठे मिल जाए तो मन प्रसन्न हो ऊंठता है, नाश्ता करने के पश्चात हम टिहरी झील के लिए निकल गए। हमने झील तक जाने के लिए कोटि कॉलोनी वाला रास्ता पकड़ लिया, इसी रास्ते से एक रास्ता नई टिहरी को चला जाता है। चम्बा से कोटि कॉलोनी मात्र 17 km की दूरी पर है इसलिए हमे ज्यादा वक्त नहीं लगा यहाँ पहुचने में, वैसे रस्ते में हमे कई वॉटरफॉल मिले जो रास्ते की खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे। वैसे इस रास्ते पर दुकाने, होटल वगैरा इतने नहीं है। थोड़े बहुत है भी तो वह साधारण से ही है। क्योंकि इधर पर्यटक ज्यादा नहीं आते है। लकिन जब टिहरी झील में श्रीनगर(कश्मीर) की डल झील की तरह शिकारे चलने लगेंगे तब इस रास्ते पर भी रौनक होगी। वैसे बोट वगैरह चलना शुरू हो गयी है और कुछ दिन बाद जब यहाँ पर हर सुविधा पर्यटकों को मिलनी लगेगी तब यहाँ से भी उत्तराखंड सरकार को काफी आय होगी। आसपास के लोगो को जीविका व्यापन के नए नए काम मिलने लगेंगे।
टिहरी झील की पहली झलक दूर से दिखी तो लगा नहीं की यह इतनी बड़ी होगी। हम थोड़ा और आगे बढे तो देखा की एक जगह तीन चार टेक्सी खड़ी थी और एक छोटा सा होटल भी था। और यहाँ से झील का व्यू भी दिख रहा है, मैंने एक व्यक्ति से पूछा की यहाँ पर बोटिंग कहा से होती है तो उन्होंने बताया कि आगे जाकर नीचे झील की तरफ रास्ता जाता है वही से बोट मिलेगी पर 10 बजे से, लकिन अभी 8:15 ही हो रहे थे। वही पर एक बहुत बड़ी बिल्डिंग बन रही थी जब यह तैयार हो जायेगी तब यही से बोट मिलेगी और रेस्टोरंट की सुविधा भी मिलेगी। हम आगे की तरफ चल पड़े लकिन वो रास्ते पर ध्यान ही नहीं गया और आगे टिहरी बाँध तक पहुच गये, आगे एक गार्ड ने हमे रोका उसने बताया कि यह आम रास्ता नहीं है केवल वही गाड़ी जा सकती है जिनको परमिशन है। हम वहा से वापिस हो गए।
पास में ही एक शिव मंदिर था जहाँ पर हम कुछ देर बैठे रहे फिर दर्शन करने के बाद वापिस चल पड़े। आगे जाकर वो रास्ता मिल गया और मैंने अपनी कार उसी रास्ते पर मोड़ दी, आगे एक हैलीपैड मिला जहा पर मैंने अपनी कार पार्क कर दी। अभी यहाँ पर कोई नहीं था। हम झील की तरफ चल पड़े। झील यहाँ से बहुत लंबी छोड़ी दिख रही थी, हरा रंग का पानी और चारो तरफ पहाड़ और उन पर बदलो का जमावड़ा यह सब मन और दिल को सकून दे रहे थे। दूर बांध का कुछ हिस्सा भी दिख रहा था। कुछ बोट अभी पानी में खड़ी थी कुछ देर बाद झील में चलती नज़र आएगी। पास की झड़ी में कुछ सुकर घूम रहे थे। जिन्हें देखकर देवांग डर गया था। फिर मैंने उसे बताया कि यह जंगली नहीं है बल्कि पालतू है। झील को निहारना बहुत अच्छा लग रहा था। अभी यहाँ पर पर्यटको को किसी भी तरह की कोई सुविधा नही है, लेकिन आने वाले सालों में यह जगह एक बेहतरीन जगहो में से एक होगी।
टिहरी झील गंगा की एक सहायक नदी भागिरती पर बनी है, इस झील पर बना बाँध दुनिया के सबसे ऊंचे बांधो में से एक है। यह झील बांध के कारण ही बनी है और यह काफी बड़ी है अगर श्रीनगर की डल झील से तुलना करें तो यह उससे काफी बड़ी है। टिहरी बांध के द्वारा बनाई गई बिजली (विधुत ) उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तरप्रदेश के काम आती है।
झील देखकर हम वापस चल पड़े, रास्ते में मजदुरो के कुछ घर दिखाई दिए जिसमे बहुत से बच्चे खेल रहे थे। हमारे पास बहुत टॉफियाँ थी जो हमने इन बच्चो को दी। फिर कुछ बच्चे और आ गए हमने इन्हें ही कुछ टॉफियां दी सभी बच्चे बहुत खुश हुए हमने उन बच्चो को बाय बाय कहा और वहाँ से चल पड़े। आगे एक गांव पड़ा वहा पर चाय की दुकान देख कर गाड़ी रोक दी। यहाँ पर चाय और बिस्किट खाये और चल दिए। रासते में कई वॉटरफॉल मिले उनमे से एक वॉटरफॉल पर थोडी देर रुक गए। पानी को ऊपर से गिरते हुए देखना व उसकी आवाज सुनना बहुत अच्छा लगता है। यहां से हम चम्बा पहुच गये, चम्बा में बहुत सेब मिल रहे थे। यह जगह सेब के लिए भी काफी फेमस है, सेब ले लिए और खाते खाते चल पड़े सुरकुंडा देवी (धनोल्टी) की तरफ.....
अब कुछ फोटो देखे जायें.....
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| टिहरी झील की पहली झलक |
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| टिहरी झील |
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| डैम की तरफ जाता रास्ता |
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| एक शिव मंदिर |
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| मैं सचिन त्यागी टिहरी झील पर |
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| यह फोटो देवांग ने लिया था। |
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| बादलों का प्रतिबिम्ब |
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| एक सेल्फी अपनी |
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| मै और मेरी कार |
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| टी टाइम |
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| वो बच्चे जीने हमने टॉफी दी थी। |
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| रास्ते में एक वॉटरफॉल। |